चुक (बैल)
丑 · 소띠
चुक (丑), बैल, कोरियाई राशिचक्र के बारह पशुओं में दूसरा है; इसके वर्ष में जन्मे लोग «सो-त्ती» (소띠) कहलाते हैं — «सो» (소) वह पशु है जिसे हिंदी में बैल या गाय कहते हैं। कोरिया के राष्ट्रीय लोक संग्रहालय के लिए बैल का वर्ष स्थिरता और शांति का वर्ष है, और यह पशु स्वयं कोरियाई खेत का निष्ठावान श्रमिक है: सीधा-सादा, ईमानदार और बलवान, फिर भी सौम्य, धैर्यवान और आज्ञाकारी, एक ऐसा पशु जिसने कभी कठिन परिश्रम से इनकार नहीं किया और जो «पीढ़ियों तक कोरियाई लोगों के घरों और दिलों में» रहा।
स्रोत: National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Cow (nfm.go.kr)
- समय
- 1:00–3:00
- महीना
- बारहवाँ चांद्र मास
- दिशा
- उत्तर-उत्तर-पूर्व
स्रोत: National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Composition of the Twelve Zodiac Animals (nfm.go.kr); National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Cow (nfm.go.kr)
बैल के वर्ष में जन्मे लोग
कहावत है, «धीमा, पर बैल की चाल से»; और संग्रहालय बताता है कि जिन लोगों ने लगन से प्रयास किया और अंत में सफल हुए, उनमें से अनेक बैल के वर्ष में जन्मे थे। कहा जाता है कि इसके वर्ष में जन्मे लोगों में लगन और परिश्रम होता है — और एक ऐसी ज़िद भी जिसे कोरियाई «ह्वांगसो-गोजिप» (황소고집), यानी «साँड़ जैसी ज़िद», कहते हैं: वे अपनी चाल से चलते हैं, दूसरों की बात कम सुनते हैं और उन्हें मनाना कठिन होता है, इसीलिए कहावत है «बैल के कान में धर्मग्रंथ पढ़ना»।
वे भले मिलनसार दिखें, कहा जाता है कि मन से अकेले होते हैं, और कुछ तो जैसे मृत्यु तक काम करने के लिए ही जन्मे हैं — हालाँकि, जैसा कि कहावतें «सर्दी में जन्मे बैल का जीवन आसान होता है» और «गर्मी का बैल छाँव में लेटा है» बताती हैं, उनका जीवन आरामदेह भी हो सकता है। शुरू करने में धीमे, पर एक बार मन बना लें तो उसे तुरंत पूरा करना ही होता है; उनकी कमज़ोरी यह है कि वे हमेशा अपनी भावनाओं पर क़ाबू नहीं रख पाते और ग़ुस्से में ऊँचा बोलने लगते हैं। कठोर के साथ कठोर, पर कमज़ोरों के प्रति वे अप्रत्याशित रूप से दयालु और सहानुभूतिपूर्ण हो सकते हैं।
स्रोत: National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Cow (nfm.go.kr)
वर्ष और सोल्लाल
पशु 1 जनवरी को नहीं, बल्कि कोरियाई नववर्ष सोल्लाल को बदलता है: यदि आपका जन्म जनवरी या फ़रवरी में हुआ है, तो अपने जन्म-वर्ष में सोल्लाल की तिथि देख लें। तिथियाँ कोरियाई पंचांग के अनुसार हैं, जैसा कि कोरिया खगोल एवं अंतरिक्ष विज्ञान संस्थान (Korea Astronomy and Space Science Institute) प्रकाशित करता है।
| वर्ष | सोल्लाल (वर्ष का आरंभ) |
|---|---|
| 1901 | 19 फ़रवरी |
| 1913 | 6 फ़रवरी |
| 1925 | 24 जनवरी |
| 1937 | 11 फ़रवरी |
| 1949 | 29 जनवरी |
| 1961 | 15 फ़रवरी |
| 1973 | 3 फ़रवरी |
| 1985 | 20 फ़रवरी |
| 1997 | 8 फ़रवरी |
| 2009 | 26 जनवरी |
| 2021 | 12 फ़रवरी |
| 2033 | 31 जनवरी |
| 2045 | 17 फ़रवरी |
कोरिया में बैल
बैल कोरियाई खेत का साथी और भरोसेमंद मित्र था। उसके मालिक उसे «सेंगगु» (生口) कहते थे, वह शब्द जो घर के सदस्य गिने जाने वाले सेवकों के लिए प्रयुक्त होता था; उसकी शक्ति मिट्टी तोड़ने वाला हल खींचती और बीज के लिए कूँड़ खोलती, पलान पर «ओंगो» (蘊罟) से खाद ढोती, चावल, जौ, बाजरा और ज्वार पीसने वाली चक्की घुमाती, और गाड़ियाँ खींचती। खेती के आधुनिक होने से पहले बैल ही खेत की उपज और आय बढ़ाता था; वही उसका परिवहन था, और अपनी क़ीमत के कारण परिवार की आपातकालीन पूँजी भी।
उसके साथ परिवार के सदस्य जैसा व्यवहार होता था। ठंड में उसे पुआल की चटाइयों से ढका जाता; वसंत से सर्दी तक हर दो सप्ताह में उसका बाड़ा साफ़ किया जाता; उसे ओस से भीगी घास कभी नहीं खिलाई जाती, रक्त-संचार के लिए उस पर ब्रश किया जाता, और लंबी यात्रा के लिए उसके खुरों में पुआल के जूते पहनाए जाते। भोर में मवेशी-बाज़ार चहल-पहल से भरे रहते, और किसान वर्षों साथ रहे बैल को बेचकर बच्चों की पढ़ाई का ख़र्च चुकाता — इसीलिए, संग्रहालय याद दिलाता है, विश्वविद्यालय को हाथीदाँत की मीनार नहीं, बल्कि «गाय की हड्डियों की मीनार» (牛骨塔) कहा जाता था।
स्रोत: National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Cow (nfm.go.kr)
प्रतीक और मान्यताएँ
बैल परिश्रम और सरल ईमानदारी का प्रतीक है; पुरानी कहावत है, «बिना बोले भी गाय में बारह गुण हैं।» पंचांग में उसका स्थान उसके स्वभाव से आता है: उसके खुर दो भागों में बँटे हैं, जो यिन का संकेत है, और उसका सौम्य, धैर्यवान स्वभाव धरती में वसंत की प्रतीक्षा करते बीजों जैसा है — यह बारहवें महीने का समय है, जब सर्दी अपने आप पीछे हटने लगती है। दिशा के देवता के रूप में वह उत्तर-उत्तर-पूर्व की रक्षा करता है, और समय के देवता के रूप में सुबह एक से तीन बजे तक के समय की।
संग्रहालय लिखता है कि उसका सीधा-सादा, निर्दोष और धैर्यवान स्वभाव कोरियाई लोगों के स्वभाव से मेल खाता था, जो दृढ़, धैर्यवान और शांत हैं और जिन्होंने सदा बैल को प्रिय रखा; उसने कोरियाई लोककथाओं के अनेक पात्रों को गढ़ने में योगदान दिया, और जब कोरियाई किसी प्यारे घर की कल्पना करते, तो उसमें एक पीली गाय होती थी।
स्रोत: National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Cow (nfm.go.kr)
कला में
गोगुर्यो (Goguryeo) की कब्रों के भित्तिचित्रों में बैल खाते हुए, गाड़ियाँ खींचते हुए, या कृषि-देवता के रूप में दिखते हैं — इस बात के संकेत कि तीन राज्यों के काल तक कोरियाई खेती बैल के इर्द-गिर्द रची जा चुकी थी। मिट्टी की एक मूर्ति में लंबे सींगों वाला एक बैल सिर झुकाए और पैर जमाए हमला करने को तैयार दिखता है। जोसॉन (Joseon) राजवंश में ताओवादी आदर्शों की ओर आकर्षित विद्वानों ने बैल को अपने प्रिय पशु के रूप में चित्रित किया, और किम होंग-दो के «ग्योंगजाकदो» (खेत का चित्र) में अपने बैल के पीछे हल चलाता एक किसान, एक कुत्ता, और एक पेड़ के नीचे बातें करते बूढ़े दिखते हैं। बैल की छवियाँ अनुष्ठान के पात्रों को भी सजाती थीं।
स्रोत: National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Cow (nfm.go.kr)
रीति-रिवाज और दैनिक जीवन
जोसॉन काल में राजा मार्च की शुरुआत में ग्योंगचिप के बाद पहले सूअर-दिवस पर कृषि-अनुष्ठान «सोननोंगजे» (先農祭) करता था: देवताओं को एक बैल अर्पित किया जाता, और राजा खेती के सम्मान में स्वयं हल से एक कूँड़ खींचता। फिर अर्पित बैल को उबालकर गोमांस का शोरबा बनाया जाता और जनता को परोसा जाता। कथा है कि जिस दिन राजा सेजोंग ने हल चलाया, उस दिन इतनी ज़ोर से बारिश हुई कि फँसे हुए और भूखे राजा और उसके दरबारियों ने अर्पित बैल खा लिया; उस शोरबे को «सोननोंगतांग», यानी «सोननोंग अनुष्ठान का शोरबा», कहा गया — आज का «सोल्लोंगतांग»।
बैलों की लड़ाई, सहनशक्ति और बल की प्रतियोगिता, कोरिया में एक हज़ार से अधिक वर्षों का इतिहास रखती है और विशेष रूप से वर्ष की पहली पूर्णिमा और चुसोक के आसपास होती थी। दक्षिण ग्योंगसांग में «सोनोरिगुत» (소놀이굿), यानी «बैल का झाड़-फूँक अनुष्ठान», पाँच-छह आदमियों द्वारा उठाए गए पुआल के बैल को संगीत, नृत्य, एक चरवाहे और एक शमन के साथ पूरे गाँव में घुमाता था, ताकि फ़सल और परिवारों की समृद्धि के लिए प्रार्थना हो, और अंत में सब मिलकर भोज करते। पहली पूर्णिमा की पूर्वसंध्या पर किसान «सोबापजुगी» (소밥주기), यानी «बैल को खिलाना», से फ़सल का अनुमान लगाते थे: अगर बैल पाँच अनाजों वाले चावल के दाने पहले खाता, तो धान की फ़सल अच्छी होती; अगर फलियाँ पहले खाता, तो कपास की। पूर्णिमा के दिन गोशाला के सामने चावल और चावल-केक की थाली रखी जाती, इस प्रार्थना के साथ कि बैल पूरे वर्ष बिना दुर्घटना के काम करे।
स्रोत: National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Cow (nfm.go.kr)
अनुकूलता
समरस त्रयी (साम्हाप)
विरोध में (वोनजिन)
बैल, साँप और मुर्गा चार समरस त्रयियों (साम्हाप, 삼합) में से एक बनाते हैं। संग्रहालय इसे प्रकृति से समझाता है: बैल साँप के विष से नहीं डरता — युवा साँप का विष तो बैल के रक्त को और प्रबल बना देता है — साँप को मुर्गे की बाँग अच्छी लगती है, और बैल चरने के बाद मुर्गे की आवाज़ सुनते हुए जुगाली करता और आराम करता है।
घोड़ा बैल का «वोनजिन» (원진) है, यानी उसका विरोधी पशु: परिश्रमी बैल घोड़े के आलस्य से चिढ़ता है, क्योंकि कहा जाता था कि घोड़ा अधिकतर खाने के सिवा कुछ किए बिना खड़ा रहता है — और सचमुच गोशाला के बग़ल में बना अस्तबल अच्छा पड़ोसी नहीं होता।