ओ (घोड़ा)

ओ (घोड़ा)

午 · 말띠

ओ (午), घोड़ा, कोरियाई राशिचक्र के बारह पशुओं में सातवाँ है; इसके वर्ष में जन्मे लोग «माल-त्ती» (말띠) कहलाते हैं। कोरिया का राष्ट्रीय लोक संग्रहालय लिखता है कि राशिचक्र के सभी पशुओं में घोड़े को सबसे गतिशील माना जाता था: आत्माओं को परलोक ले जाने वाला पौराणिक पशु, शक्ति और योग्यता का, नेता का प्रतीक — और आज तक कोरियाई जनता की ऊर्जा का। «घोड़ा नई धरती पर पड़ने वाले हर क़दम को धकेलकर दौड़ता है। घोड़े की ऊर्जा कोरियाई लोगों की आत्मा जैसी है।»

स्रोत: National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Horse (nfm.go.kr); National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Harmony of the Zodiac Animals (nfm.go.kr)

समय
11:00–13:00
महीना
पाँचवाँ चांद्र मास
ऋतु-काल
मांगजोंग से सोसो की पूर्वसंध्या तक
दिशा
दक्षिण
यिन–यांग
यिन
तत्व
अग्नि

स्रोत: National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Composition of the Twelve Zodiac Animals (nfm.go.kr); National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Horse (nfm.go.kr); National Folk Museum of Korea, 한국민속상징사전, «말띠»

घोड़े के वर्ष में जन्मे लोग

कहा जाता है कि घोड़े के वर्ष में जन्मे लोग घोड़े का वह स्वभाव पाते हैं जिसमें यांग के शिखर पर यिन जन्म लेता है। बाहर से वे गर्मी और सक्रियता से भरे होते हैं — उस डाक-घोड़े की तरह जो उन बड़े पड़ावों के बीच चलता है जहाँ हर दिशा से सड़कें मिलती हैं — पर भीतर से, प्रतीक-विश्वकोश के अनुसार, वे अँधेरे को रोशन करने वाली «सभ्यता की अग्नि» हैं: बौद्धिक जीवन, शिक्षा, धर्म, कलाओं और संस्कृति के लिए प्रतिभाशाली, और शारीरिक की अपेक्षा मानसिक काम के लिए अधिक उपयुक्त। विश्वकोश जोड़ता है कि चूँकि 午 शाखाओं में सबसे अग्निमय है और उसका पशु इतना सक्रिय, इसने घोड़े के वर्षों में जन्मी स्त्रियों की सामाजिक छवि को आकार दिया है।

विश्वकोश साठ-वर्षीय चक्र के पाँच घोड़ा-वर्षों में से हर एक का चित्र उसके रंग के साथ देता है: «गाबो» (甲午) वर्ष में जन्मे लोग नीला घोड़ा हैं — अति-आत्मविश्वासी और दूसरों को हेय समझने की प्रवृत्ति वाले, वाक्पटु और कलात्मक, शारीरिक की अपेक्षा मानसिक काम में बेहतर, और उन्हें गपशप से सावधान रहना चाहिए; «ब्योंगो» (丙午) लाल घोड़ा — खुले, उदार और मिलनसार, जल्दबाज़, बेधड़क और रूखे, पर मन में मैल न रखने वाले; «मूओ» (戊午) पीला घोड़ा — धर्म, दर्शन और शिक्षा की ओर आकर्षित, रूढ़िवादी और अड़ियल पर साहसी, और जल्दी ऊब जाने वाले; «ग्योंगो» (庚午) सफ़ेद घोड़ा — वफ़ादार और अपने सम्मान के प्रति सजग, परंपरावादी, किसी संगठन में अच्छे पर अपने व्यापार में कम; «इमो» (壬午) काला घोड़ा — धन और प्रेम में गहरी रुचि रखने वाले, और धन तथा पद दोनों में भाग्यशाली। वह यह भी जोड़ता है कि घोड़ा-जन्मे लोगों के लिए साम्जे — दुर्भाग्य के तीन वर्ष — बंदर, मुर्गे और कुत्ते के वर्षों में पड़ते हैं।

स्रोत: National Folk Museum of Korea, 한국민속상징사전, «말띠»

वर्ष और सोल्लाल

पशु 1 जनवरी को नहीं, बल्कि कोरियाई नववर्ष सोल्लाल को बदलता है: यदि आपका जन्म जनवरी या फ़रवरी में हुआ है, तो अपने जन्म-वर्ष में सोल्लाल की तिथि देख लें। तिथियाँ कोरियाई पंचांग के अनुसार हैं, जैसा कि कोरिया खगोल एवं अंतरिक्ष विज्ञान संस्थान (Korea Astronomy and Space Science Institute) प्रकाशित करता है।

वर्ष सोल्लाल (वर्ष का आरंभ)
1906 25 जनवरी
1918 11 फ़रवरी
1930 30 जनवरी
1942 15 फ़रवरी
1954 4 फ़रवरी
1966 22 जनवरी
1978 7 फ़रवरी
1990 27 जनवरी
2002 12 फ़रवरी
2014 31 जनवरी
2026 17 फ़रवरी
2038 4 फ़रवरी
2050 23 जनवरी

स्रोत: Korea Astronomy and Space Science Institute (KASI), 음양력 변환 (solar–lunar calendar conversion, astro.kasi.re.kr)

कोरिया में घोड़ा

कोरियाई लोगों के लिए घोड़ा पशुधन से बढ़कर था। वह परिवहन का साधन और रोज़मर्रा जीवन का हिस्सा था, लोगों के साथ काम करता और शिकार करता था, और इतना महत्वपूर्ण सैन्य संसाधन था कि केंद्र सरकार सीधे उसका प्रबंध करती थी; डाक-घोड़े ज़रूरी संदेश ले जाते और युद्ध-घोड़े लड़ाई में काम आते। जोसॉन (Joseon) काल में राज्य के घोड़ों को वितरण-मानचित्रों पर दर्ज किया जाता था, और घोड़ों के उपचार और प्रबंधन पर लिखी पुस्तकें दिखाती हैं कि उनकी कितनी देखभाल होती थी। एकीकृत शिल्ला (Silla) से गोरियो (Goryeo) और जोसॉन तक वह खेत का घोड़ा, कला और शिल्प का विषय, सैन्य सवारी और संदेशवाहक रहा।

सबसे प्रसिद्ध कोरियाई नस्ल जेजू (Jeju) का घोड़ा है, जिसे कहा जाता है कि बुयो और गोगुर्यो (Goguryeo) के दिनों से पाला जाता रहा: इतना छोटा और गठीला कि फलों के पेड़ों के नीचे से निकल जाए — इसीलिए उसका नाम «ग्वाहामा», यानी «फलों के पेड़ों के नीचे का घोड़ा» — फिर भी बहुत सहनशील, और एक बहुमूल्य संपत्ति। आज कोरिया में कुछ इलाक़ों, पर्यटन-स्थलों और घुड़दौड़ के मैदानों के बाहर घोड़े कम ही दिखते हैं, पर संग्रहालय बताता है कि उनकी छवि कंपनियों और उत्पादों के प्रतीक के रूप में जीवित है।

स्रोत: National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Horse (nfm.go.kr)

प्रतीक और मान्यताएँ

प्राचीन अवशेषों में घोड़ा वह प्राणी है जो इस जीवन को अगले से जोड़ता है: गया (Gaya) और शिल्ला की कब्रों में मिले घोड़े के आकार के पात्र, घोड़े के पैर और घुड़सवार आकृतियाँ, और गोगुर्यो की कब्रों के भित्तिचित्रों के घोड़े मृतकों और उनकी आत्माओं को परलोक की ओर सवार होकर जाते दिखाते हैं, और अंत्येष्टि में मृतक को वहाँ जाने के लिए एक घोड़ा दिया जाता था। «तीन राज्यों की स्मृतियाँ» और «तीन राज्यों का इतिहास» दोनों घोड़े को एक पवित्र प्राणी बताते हैं: वह गुमवा, बाक ह्योकगोसे और जुमोंग जैसे संस्थापक राजाओं के जन्म पर शुभ संकेतों में प्रकट हुआ, और बैकजे (Baekje) के पतन की भविष्यवाणी करने के लिए भी एक घोड़ा प्रकट हुआ।

प्रतीक-विश्वकोश बताता है कि 午 अक्षर उस क्षण को दर्शाता है जब यांग ऊर्जा अपने शिखर पर होती है और यिन की एक अकेली धारा नीचे से उठने लगती है और उसे और फैलने से रोकती है — यिन, यांग के विरुद्ध, तीर (矢) की तरह ऊपर भेदता हुआ। बारह शाखाओं में 午 सबसे तीव्र अग्निमय है, और उसका पशु बहुत सक्रिय है, डाक-मार्गों का घोड़ा।

स्रोत: National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Horse (nfm.go.kr); National Folk Museum of Korea, 한국민속상징사전, «말띠»

कला में

«चोनमादो», यानी «स्वर्गीय घोड़े का चित्र», घोड़े को एक स्वर्गीय पशु के स्तर तक उठाता है और प्राचीन शिल्ला के सौंदर्य-बोध को जैसा था वैसा दिखाता है। प्राचीन कब्रों में घोड़े के अनेक साज़ो-सामान भी मिलते हैं — आभूषण, पट्टे, घंटियाँ — इस बात के संकेत कि घोड़ा लोगों के निकट रहने वाला एक मूल्यवान पशु था। बाद के समय में पुराने उपन्यासों, गद्य और लोकगीतों में साईस, युवक, प्रेमी, पथ-प्रदर्शक और बलवान लोग घोड़े पर सवार होते थे।

स्रोत: National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Horse (nfm.go.kr)

रीति-रिवाज और दैनिक जीवन

मौसमी रीति-रिवाजों में घोड़ा छह पालतू पशुओं में से एक था, और पहले और दसवें चांद्र मास के अंतिम दिन अश्व-देवता के अनुष्ठान होते थे। कुछ गाँव आज भी घोड़ों को मूर्तियों, चित्रों या अपने देवस्थानों में रखते हैं: माना जाता था कि गाँव के रक्षक देवता घोड़े पर सवार होते हैं, बाघों के हमलों से बचाव के लिए उसे प्रतिष्ठित किया जाता था, और कड़ाहों और मिट्टी के बर्तनों की कार्यशालाओं की सफलता के लिए उसे अर्पित किया जाता था।

घोड़े «मासांगजे» और «याकमाही» जैसे उत्सवों में, जो स्थानीय देवताओं के मनोरंजन के अनुष्ठान थे, और «ग्योकगू» (擊毬) में भी भाग लेते थे, जो पोलो जैसा खेल है जिसमें सवार एक लाल गेंद को मारकर एक द्वार से बाहर निकालते थे — संग्रहालय के अनुसार ऐसा खेल जिसमें सवार और घोड़े के दिल एक साथ धड़कते थे।

स्रोत: National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Horse (nfm.go.kr)

अनुकूलता

समरस त्रयी (साम्हाप)

इन (बाघ), सुल (कुत्ता)

विरोध में (वोनजिन)

चुक (बैल)

घोड़ा, बाघ और कुत्ता चार समरस त्रयियों (साम्हाप, 삼합) में से एक बनाते हैं: संग्रहालय के शब्दों में बाघ की दहाड़, कुत्ते का धातु-जैसा भौंकना और घोड़े की हिनहिनाहट आपस में समरस हैं। प्रतीक-विश्वकोश घोड़े के मित्रों में भेड़ को जोड़ता है और चूहे को वह पशु बताता है जिससे उसकी टक्कर होती है।

बैल घोड़े का «वोनजिन» (원진; 牛嗔馬不耕) है, यानी उसका विरोधी पशु: «बैल उस घोड़े से चिढ़ता है जो हल नहीं चलाता»। परिश्रमी बैल उस घोड़े को सहन नहीं कर पाता जो अधिकतर खाने के सिवा कुछ किए बिना खड़ा रहता है — और सचमुच गोशाला के बग़ल में बना अस्तबल अच्छा पड़ोसी नहीं होता। विश्वकोश बताता है कि वोनजिन का अर्थ है कि दोनों एक-दूसरे के प्रति स्नेह भी रखते हैं और घृणा तथा द्वेष भी, और विवाह की अनुकूलता में इसका बड़ा महत्व है।

स्रोत: National Folk Museum of Korea, The Story of the Twelve Animals of the Korean Zodiac: Harmony of the Zodiac Animals (nfm.go.kr); National Folk Museum of Korea, 한국민속상징사전, «말띠»